Gandhi ji ki mrutyu kab hui thi ( महात्मा गांधी की मृत्यु कब हुई ) 1948

Gandhi ji ki mrutyu kab hui thi
Gandhi ji ki mrutyu kab hui thi

mahatma gandhi ki mrityu kab hui(महात्मा गांधी की मृत्यु कब हुई थी), gandhi ji ki mrityu kab hui: गांधी जी अत्यधिक बुद्धिमान और विद्वान पुरुष थे unka जन्म हमारे देश में हुआ ये हमारे लिए बहुत ही गर्व(proud) की बात थी वो कहते है न की जहां अच्छाई होती है वहां कही ना कही आस पास बुराई भी पनप जाती है। बिल्कुल ऐसा ही हुआ जब महात्मा गांधी हमारे देश को azad करने में लगे थे |

तब कुछ लोग उनकी अच्छे से जलने लगे था और महात्मा गांधी जी को मारने की कोशिश करी। यहाँ आज हम इसी के बारे में बात करेंगे की आखिर महात्मा गांधी  मृत्यु कैसे  हुई, किसने की और कब और कहा हुई इन बातो को जानना हमारे लिए बहुत ही ज्यादा जरूरी है।

Gandhi ji ki mrutyu kab hui thi ( महात्मा गांधी की मृत्यु कब हुई थी )

Gandhi ji ki mrutyu kab hui thi: Mahatma Gandhi की मृत्यु 30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली में स्थित बिरला हाउस में हुई जो अब गांधी स्मृति (Gandhi Smriti) के naam से जाना जाता है। उनकी हत्या नाथूराम गोडसे (Nathuram Godse) ने गोली मार कर की थी।

वो दिन बहुत ही दुखद दिन के नाम से जाना जाता है, जब हमने अपने महात्मा को खोया हमारा देश हमेशा 30 जनवरी को याद रखता है और उस दिन पूरा देश गांधीजी को श्रद्धांजलि देता है दिल्ली शहर में उनके लिए राजघाट भी बनाया गया था वहां उनको श्रद्धांजलि दी जाती है। यानि की आप यह अच्छे से जान गए की Mahatma Gandhi ki mrityu kab hui ? Mahatma Gandhi ki mrityu 30 जनवरी 1948 को हुई थी।

हमारे लिए mahatma gandhi ki mrutyu kab hui thi जानना बहुत जरुरी है, क्योंकि गांधी जी हमारे राष्ट्रपिता हैं उन्होंने हमारे देश को आज़ाद करने के लिए बहुत योगदान दिया है इसलिए एक बार हम फिर से बताना चाहते हैं कि mahatma gandhi ki mrityu 30 जनवरी 1948 को हुई थी।

अगर आपलोग महात्मा गांधी के जन्म के बारे जानना चाहते है तो यहाँ पर क्लिक करे – महात्मा गांधी का जन्म कब ओर कहाँ हुआ था ?

Mahatma gandhi ki mrityu kab hui thi

गोडसे ने महात्मा गाँधी को क्यों गोली मारी 

आखिर क्यों Nathuram godse ने उसे शुद्ध आत्मा को क्यों मारा (Mahatma gandhi ki mrityu kab hui thi) ये सच में एक अधिक जटिल प्रश्न है और जिसका उत्तर aajtak नहीं मिल पाया लेकिन नाथूराम गोडसे ने गांधीजी की हत्या के बाद कुछ बयान  दिए था उन बयानों के अनुसार नाथूराम गोडसे ने जो कहा हम यहाँ वही बता रहे है। नाथूराम गोडसे(Nathuram Godse) भी उन लोगों में से ही एक था जो भी महात्मा गांधी जी के विचार और सोच से प्रभावित था। लेकिन जब गांधीजी ने मुस्लिम समुदाय के पक्ष में अपना उपवास किया (fasting) और अपना फैसला मनवाया लिया था तब से नाथूराम गोडसे को गांधी जी की इस विचारधारा से बुरा लगा।

उन्हें लगा की ये तो hindutva के साथ किया गया एक अन्याय है तब उसने गांधी जी को हटा देने का निर्णय किया usne गांधीजी को मरने के कई बार कोशिश भी की लेकिन finally, 30 अक्टूबर 1948 को jab gandhiji बिरला हाउस में थे तब vaha पर गोडसे ने गांधी जी को तीन गोली मारी isse उनकी वही के वही मौत(death) हो गयी। बाद godse ने court में apni सफाई में बयानों में ये बताया था की उनकी गांधीजी से कोई आपसी दुश्मनी  नहीं थी ये तो राजनीति के कारण किया था। 

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नाथूराम गोडसे कौन था 

mahatma gandhi ki mrityu kab hui: नाथूराम गोडसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(Rashtriya Swayamsevak Sangh or RSS) का सदस्य था। उसने महात्मा गांधी जी की मृत्यु करी थी नाथूराम गोडसे का पूरा नाम नाथूराम विनायक गोडसे था।  

नाथूराम गोडसे ने एक संघ भी स्थापित किया था जिसका नाम हिन्दू राष्ट्रीय दाल(Hindu Rashtriya Dal) था। इस राष्ट्रीय दाल का काम उन लोगो को सपोर्ट करना था जो देश की आज़ादी के लिए काम कर रहे था। वैसे एक बात और है जो काफी चौका देने वाली है और वो ये की नाथूराम गोडसे भी पहले शुरुआत में महात्मा गांधीजी का बहुत बढ़ अनुयायी थे और गाँधी जी के कुछ movement ने उसे अधिक से ज्यादा प्रभावित किया था।

लेकिन जब गांधी जी ने मुस्लिमों के लिखे अपना उपवास रखा अपनी बात मनवाने के लिए तब से वह महात्मा गांधी जी के विरुद्ध हो गया था और उनकी इस विचारधारा को हिन्दुओं के लिए अन्याय की तरह देखता था।

महात्मा गांधी के बारे 

यहाँ हम महात्मा गाँधी जी के बारे में कुछ बातें करेंगे की Mahatma gandhi ki mrityu kab hui thi ओर उन्होंने हमारे लिए क्या क्या किया है ताकि उनको जान सके आखिर उन्होंने हमे बहुत कुछ सिखाया है तो हमारा ये फ़र्ज़ बनता है। की हम ऐसे महात्मा को ठीक से समझे और उनको जान सके –

  • गांधी जी का असली नाम मोहनदास करमचंद गाँधी था इसमें जो करमचंद नाम है। वो इनके पिता का है ये अपने पिता को बहुत ही ज्यादा मानते था बिलकुल अपने गुरु की तरह। 
  • गांधीजी का जन्म
  • गांधीजी के पिता करमचंद गांधी था और माता name पुतलीबाई था।
  • गांधी जी एक आदर्शवादी इंसान थे ये अहिंसा यानी Non-violence पर विश्वास रखते था। 
  • उन्होंने अपनी ज़िन्दगी बेहद ही साधारण तरीके से बिताई एक आश्रम में जो अहमदाबाद गुजरात में है। 
  • गाँधी जी के विचारो से उनकी अच्छी सोच से हर कोई उनसे जुड़ना चाहता था उनके साथ मिलकर काम करना चाहते था। 
  • गाँधी जी ने  हमारे देश में अनेक लीडर खड़े किये जिन्होंने आगे चलकर देश को आज़ाद करने में महतवपूर्ण भूमिका दिलाई। 
  • गांधीजी ने बिना  हिंसा किये भी  ब्रिटिश सरकार की नाक में दम कर रखा था उनका ऐसा मानना था की अपनी समझदारी और बुद्धिमता से हर तरह की जंग जीती जा सकती है।
  • महात्मा गाँधी जी के अलवा और भी फ्रीडम फिघ्टर्स थे जिन्होंने देश को आज़ादी दिलाने में अपना योगदान दिया। हलाकि उनकी विचार धारा गांधीजी की विचारधारा से बिलकुल अलग थी वो लोग हिंसा पर विश्वास रखते थे उनका मानना था की लड़ाई लड़ कर ही हम देश को आज़ादी दिला सकते है। 
  • भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद गाँधी जी के अनुयायी थे।

ये भी जाने –

गांधी जी की मृत्यु कब और किस प्रकार हुई थी ?

गांधी जी की मृत्यु 30 जनवरी 1948 को नाथूराम के हत्या से हुई थी |

नाथूरम गोडसे की मृत्यु कब हुई थी ?

नाथूरम गोडसे की मृत्यु 15 नवम्बर 1949 को हुई थी |

महात्मा गांधी कौन थे ?

महात्मा गांधी एक वकील, activist आंदोलन कर्ता थे उन्होंने देश को azad करने में एक महत्वपूर्ण role निभाया। 

मोहनदास karamchand गांधी का जन्म kab हुआ था?

महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर को 1869 में पोरबंदर में हुआ और 2 अक्टूबर को हर साल holiday रखा जाता है।

गांधी जी की मृत्यु के पीछे कौन था?

mahatma gandhi ki mrityu kab hui 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे के द्वारा गोली मार कर। 

गांधी जी किस विचारधारा वाले इंसान थे?

गांधी जी बहुत ही सरल विचार वाले व्यक्ति था वह अहिंसा यानी non-violence के रास्ते पर चलते थे और सबको भी यही सिखाते थे।

कौन-कौन से movement गांधी जी ने शुरू किये थे?

Khilafat andolan, Satyagrah andolan, Quit india movement, और Non-cooperationmovement  आदि में गांधीजी ने ख़ास योगदान दिया था। 

Mahatma  गांधी जी के और कौन कौन से naam है?

गाँधी जी का वैसे तो पूरा नाम मोहनदास करमचंद गाँधी था लेकिन उनके विचारो के कारण लोग उन्हें महात्मा भी कहने लगे। फिर धीर धीरे उनका नाम महात्मा गाँधी ही पढ़ गया महात्मा गाँधी जी को राष्ट्रपिता भी कहकर बुलाया जाता है।

आखिरी बातें

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